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What is Citizenship Amendment Bill: All you need to know

What is Citizenship Amendment Bill: All you need to know

Know The Citizenship Amendment Bill

  1. What is Citizenship (Amendment) Bill?
    The Citizenship (Amendment) Bill seeks to provide Indian nationality to six communities — Hindus, Christians, Sikhs, Parsis, Jains and Buddhists fleeing persecution from Pakistan, Afghanistan, and Bangladesh. The bill amends the Citizenship Act, 1955 to make illegal migrants in the select categories eligible for citizenship.
  2. What does the government say:
    Defence minister Rajnath Singh made it clear at the meeting of the BJP parliamentary party on Tuesday that the contentious legislation was the top priority of the government, equating its significance with the decision to turn Article 370 into a dead letter. “Minorities in the neighboring theocratic countries have been subjected to continuous persecutions, which forced them to seek asylum in India. Giving citizenship to six minorities will be yet another push from the Modi government to the spirit of ‘sarva dharma sambhav’,” Singh said.
  3. What does the opposition say:
    The legislation has been attacked by opposition parties, minority outfits and others for leaving out Muslims and also on the grounds that it is at odds with the Constitution, which does not differentiate between citizens on the basis of their faith.
  4. Who are the parties opposing/supporting the Bill?
    Congress, Trinamool, DMK, Samajwadi Party, RJD and Left, and even regional parties like BJD have expressed reservations. BJP’s Assam ally AGP seemed to have warmed up to the idea of CAB after the government assured changes to the Bill. The government is likely to get the support of regional allies — Akali Dal and JD(U). AIADMK, meanwhile, is likely to take a cautious approach before clarifying its stand on the Bill.
  5. Will the government be able to get the Bill passed?
    While BJP is not likely to face any opposition in Lok Sabha owing to its overwhelming majority in the Lower House, in Rajya Sabha it is banking on the support of allies like JD(U) and Akali Dal. The opposition, however, is hoping that BJP’s allies will not be as enthusiastic about the legislation and “friendly” parties like AIADMK will also be constrained to carefully consider whether to support the Citizenship (Amendment) Bill.
  6. Why are some northeast states opposing the Bill?
    The CAB has sparked resentment in the northeast as it is feared that granting citizenship to foreign refugees will undermine the ethnic communities living in these regions. There are indications that the government is working out a compromise. Formulations like provision of citizenship not leading to residency status in the smaller north-east states were discussed.
  7. Why has BJP’s Assam-ally AGP taken a U-turn on CAB?
    In January last year, BJP’s ally Asom Gana Parishad (AGP) had pulled out of NDA after Lok Sabha passed the earlier version of the Bill, which BJP had introduced in Parliament in 2016. When the Bill lapsed in the Lok Sabha, AGP returned to the alliance. Recently, the AGP has indicated a U-turn on the proposed Bill. “We have to move forward with the reality — neither can we expel lakhs of illegal migrants nor will Bangladesh ever take them back. We had our government twice in the past but we could not even identify the illegal migrants. Unfortunately, the Assam Accord has only gathered dust for over 34 years,” AGP member and Assam minister Atul Bora said.

In Hindi क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक

देश में घुसपैठियों का मामला काफी समय से चर्चा का विषय है। घुसपैठियों को देश से बाहर करने की दिशा में सबसे पहले असम में एनआरसी यानी नैशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस पर काम हुआ। लेकिन एनआरसी को लेकर यह विवाद हुआ कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को भी नागरिकता की लिस्ट से बाहर रखा गया है जो देश के असल निवासी हैं।

  1. क्या है नागरिकता संशोधन विधेयक?
    नागरिकता संशोधन विधेयक में नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन का प्रावधान है। इसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाना है। मौजूदा समय में किसी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए कम से कम पिछले 11 साल से यहां रहना अनिवार्य है। इस नियम को आसान बनाकर नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक साल से लेकर 6 साल करना है यानी इन तीनों देशों के ऊपर उल्लिखित छह धर्मों के बीते एक से छह सालों में भारत आकर बसे लोगों को नागरिकता मिल सकेगी। आसान शब्दों में कहा जाए तो भारत के तीन मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी देशों से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को नागरिकता देने के नियम को आसान बनाना है।
  2. कौन है अवैध प्रवासी?
    नागरिकता कानून, 1955 के मुताबिक अवैध प्रवासियों को भारत की नागरिकता नहीं मिल सकती है। इस कानून के तहत उनलोगों को अवैध प्रवासी माना गया है जो भारत में वैध यात्रा दस्तावेज जैसे पासपोर्ट और वीजा के बगैर घुस आए हों या फिर वैध दस्तावेज के साथ तो भारत में आए हों लेकिन उसमें उल्लिखित अवधि से ज्यादा समय तक यहां रुक जाएं।
  3. अवैध प्रवासियों के लिए क्या है प्रावधान?
    अवैध प्रवासियों को या तो जेल में रखा जा सकता है या फिर विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के तहत वापस उनके देश भेजा जा सकता है। लेकिन केंद्र सरकार ने साल 2015 और 2016 में उपरोक्त 1946 और 1920 के कानूनों में संशोधन करके अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिस्चन को छूट दे दी है। इसका मतलब यह हुआ कि इन धर्मों से संबंध रखने वाले लोग अगर भारत में वैध दस्तावेजों के बगैर भी रहते हैं तो उनको न तो जेल में डाला जा सकता है और न उनको निर्वासित किया जा सकता है। यह छूट उपरोक्त धार्मिक समूह के उनलोगों को प्राप्त है जो 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत पहुंचे हैं। इन्हीं धार्मिक समूहों से संबंध रखने वाले लोगों को भारत की नागरिकता का पात्र बनाने के लिए नागरिकता कानून, 1955 में संशोधन के लिए नागरिकता संशोधन विधेयक, 2016 संसद में पेश किया गया था।
  4. विधेयक का क्या हुआ?
    इस विधेयक को 19 जुलाई, 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था और 12 अगस्त, 2016 को इसे संयुक्त संसदीय कमिटी के पास भेजा गया था। कमिटी ने 7 जनवरी, 2019 को अपनी रिपोर्ट सौंपी। उसके बाद अगले दिन यानी 8 जनवरी, 2019 को विधेयक को लोकसभा में पास किया गया। लेकिन उस समय राज्य सभा में यह विधेयक पेश नहीं हो पाया था। इस विधेयक को शीतकालीन सत्र में सरकार की फिर से नए सिरे पेश करने की तैयारी है। अब फिर से संसद के दोनों सदनों से पास होने के बाद ही यह कानून बन पाएगा।
  5. फिर दोनों सदनों से पास कराने की जरूरत क्यों?
    संसदीय प्रक्रियाओं के नियम के मुताबिक, अगर कोई विधेयक लोकसभा में पास हो जाता है लेकिन राज्य सभा में पास नहीं हो पाता और लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो जाता है तो वह विधेयक निष्प्रभावी हो जाता है यानी उसको फिर से दोनों सदनों में पास कराना होगा। वहीं राज्य सभा से संबंधित नियम अलग है। अगर कोई विधेयक राज्य सभा में लंबित हो और लोकसभा से पास नहीं हो पाता और लोकसभा भंग हो जाती है तो वह विधेयक निष्प्रभावी नहीं होता है। चूंकि यह विधेयक राज्यसभा से पास नहीं हो पाया था और इसी बीच 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त हो गया, इसलिए इस विधेयक को फिर से दोनों सदनों में पास कराना होगा।
  6. विधेयक को लेकर विवाद क्या है?
    विपक्ष का सबसे बड़ा विरोध यह है कि इसमें खासतौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया गया है। उनका तर्क है कि यह संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है जो समानता के अधिकार की बात करता है।
  7. पूर्वोत्तर के लोगों का क्या है रुख?
    बता दें कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक बड़े वर्ग का कहना है कि अगर नागरिकता संशोधन विधेयक को लागू किया जाता है तो पूर्वोत्तर के मूल लोगों के सामने पहचान और आजीविका का संकट पैदा हो जाएगा।

Source: TOI(English) & NavBharat Times(Hindi)

 

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