चीन को संदेश

रक्षा सेवाओं के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को साफ कर दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति बहाल करने के लिए चल रही सैन्य और कूटनीतिक बातचीत का अगर कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला तो भारतीय सशस्त्र सेनाएं सैन्य विकल्पों के लिए भी तैयार हैं। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि भारत अब किसी भी सूरत में चीन के सामने झुकने वाला नहीं है।

चीन को संदेश - A JanSatta Editorial
चीन को संदेश – A JanSatta Editorial

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय हिस्से में जमे चीनी सैनिकों को पीछे हटाने को लेकर चीन के प्रस्ताव के जवाब में भारत ने जिस तरह का सख्त रवैया दिखाते हुए जो जवाब दिया है, उसके निहितार्थ चीन को समझने चाहिए। रक्षा सेवाओं के प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने सोमवार को साफ कर दिया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति बहाल करने के लिए चल रही सैन्य और कूटनीतिक बातचीत का अगर कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला तो भारतीय सशस्त्र सेनाएं सैन्य विकल्पों के लिए भी तैयार हैं। उनके इस बयान से स्पष्ट है कि भारत अब किसी भी सूरत में चीन के सामने झुकने वाला नहीं है।

चीन ने कहा है कि वह फिंगर-4 क्षेत्र से अब तभी हटेगा, जब भारत भी समान दूरी तक पीछे हटे। सवाल है कि अपने ही इलाके में आखिर भारत क्यों पीछे हटेगा! हकीकत यह है कि चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा लांघ कर भारतीय क्षेत्र में कब्जा कर लिया है। पिछले तीन महीने से भारत-चीन सीमा पर जो अशांति चल रही है, उसे दूर करने के लिए अब तक हुई सैन्य स्तरों की वार्ताओं और कूटनीतिक प्रयासों का अपेक्षित नतीजा सामने नहीं आया है। ऐसे में अब चीन मामले को और विवादास्पद व पेचीदा बनाने के रास्ते पर चल पड़ा है।

सीमाओं को लेकर नए-नए विवाद खड़े करना चीन की पुरानी फितरत रही है। गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो झील में चीन ने यही किया है। यह सर्वविदित तथ्य है कि ये इलाके भारतीय सीमा क्षेत्र में हैं। पंद्रह और सोलह जून की रात चीनी सैनिकों ने पहले भारतीय क्षेत्र में घुस कर भारतीय सैनिकों पर हमला किया और फिर वहां कब्जा जमा लिया। अब वह इस क्षेत्र को विवादित रूप दे रहा है और पीछे हटने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है।

ताजा स्थिति यह है कि चीनी सेना फिंगर-5 से फिंगर-8 क्षेत्र के बीच पांच किलोमीटर इलाके में भारी साजो-सामान के साथ मौजूद है और इस क्षेत्र में वह स्थायी रूप से डेरा जमाने की तैयारी में है। इस वक्त जिस तरह के हालात हैं, उनसे इस बात के संकेत दूर-दूर तक नहीं मिल रहे कि चीन आसानी से मानने वाला है।

अगर सैन्य स्तर की वार्ताओं और कूटनीतिक उपायों से मामला नहीं सुलझता है, तो जाहिर है भारत के पास सैन्य विकल्प ही बचता है। भारतीय सेना जिस तरह से तैयार है, वह इस बात का संकेत है कि जरूरत पड़ी तो चीनी सैनिकों को खदेड़ने के लिए सैन्य विकल्प पर भी विचार किया जा सकता है। लेकिन भारत अपनी ओर से ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहता जिससे क्षेत्रीय शांति पर आंच आए। पर साथ ही भारत यह साफ कर चुका है कि अगर चीन ने भारतीय क्षेत्र से अपने सैनिकों नहीं हटाया तो उसके पास इस स्थिति से निपटने के लिए सारे विकल्प खुले हुए हैं।

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है। साढ़े चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी सीमा पर समय-समय पर घुसपैठ और कब्जे करके चीन इस तरह के नए विवादित क्षेत्रों को जन्म देता रहा है। डोकलाम से लेकर देपसांग तक और पूर्वी लद्दाख में उसका एक-सा चरित्र रहा है। सवाल है कि ऐसे कितने विवाद और खड़े करेगा चीन। भारत के लिए यह चुनौतीभरा वक्त इसलिए भी है कि अगर जल्दी ही फिंगर-4 क्षेत्र से चीनी सैनिकों को नहीं हटाया गया, तो वह लंबे समय तक इस क्षेत्र में बना रह सकता है। इसलिए अब जरूरत है कि भारत चीन को उसी की भाषा में जवाब दे।

source: jansatta